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सफेद रंग का वेलनेस ट्रेंड: मानसिक स्वास्थ्य का नया ढोंग या एक गहरी साजिश?

By Diya Sharma • December 20, 2025

सफेद क्रांति: जब मानसिक स्वास्थ्य सिर्फ रंगीन नहीं रहा

आजकल सोशल मीडिया पर एक अजीबोगरीब ट्रेंड छाया हुआ है: **'ऑल-व्हाइट वेलनेस'** (All-White Wellness)। हर जगह सफेद लिनेन, सफेद कमरे, सफेद आहार—मानो दुनिया का सारा तनाव धोकर सफेद कर दिया गया हो। यह ट्रेंड तेज़ी से वायरल हो रहा है, और दावा किया जा रहा है कि यह **मानसिक स्वास्थ्य** (Mental Health) को बढ़ावा देता है। लेकिन एक खोजी पत्रकार के रूप में, मेरा सवाल यह है: क्या यह सच में मानसिक शांति है, या यह सिर्फ एक और कॉर्पोरेट-प्रायोजित 'माइक्रो-ट्रेंड' है जो हमें वास्तविक समस्याओं से भटका रहा है? इस लेख में, हम इस सफेद बुलबुले के पीछे की सच्चाई को उजागर करेंगे।

सतह के नीचे: सफेद रंग का मनोवैज्ञानिक जाल

सफेद रंग हमेशा से पवित्रता, सादगी और नई शुरुआत का प्रतीक रहा है। जब हम इसे वेलनेस से जोड़ते हैं, तो यह तुरंत एक 'शुद्ध' और 'विषाक्तता-मुक्त' जीवनशैली का भ्रम पैदा करता है। यह वही पुरानी मार्केटिंग रणनीति है, बस नए रंग में रंगी हुई है। फोकस इस बात पर है कि आप क्या *नहीं* कर रहे हैं (तनाव, शोर, रंग), बजाय इसके कि आप क्या *कर* रहे हैं। यह एक खतरनाक खेल है। **वेलनेस उद्योग** (Wellness Industry) जानता है कि लोग नियंत्रण चाहते हैं, और सफेद रंग नियंत्रण का अंतिम रूप प्रस्तुत करता है। यह हमें विश्वास दिलाता है कि यदि हमारी बाहरी दुनिया सफेद और व्यवस्थित है, तो हमारी आंतरिक दुनिया भी वैसी ही होगी।

असली विजेता कौन? उपभोक्ता बनाम निर्माता

इस तथाकथित क्रांति का सबसे बड़ा लाभार्थी कौन है? निश्चित रूप से, उपभोक्ता नहीं। असली विजेता वे ब्रांड हैं जो अब महंगे सफेद कपड़े, सफेद सिरेमिक और 'डिटॉक्स' सफेद खाद्य पदार्थ बेच रहे हैं। यह एक क्लासिक मामला है जहां **तनाव प्रबंधन** (Stress Management) को एक लक्जरी वस्तु बना दिया गया है। जब लोग सफेद चादरों में लिपटकर फोटो पोस्ट करते हैं, तो वे अनजाने में उस उपभोक्तावाद को बढ़ावा दे रहे हैं जो शायद उनके तनाव का मूल कारण है। हम एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जहां मानसिक स्वास्थ्य को 'दिखाने' की होड़ लग गई है, न कि उसे वास्तव में महसूस करने की। यह एक विडंबना है कि सादगी के नाम पर, हम और अधिक सामान खरीद रहे हैं।

भविष्य की भविष्यवाणी: सफेद रंग का अंत और 'डार्क मोड' का उदय

यह सफेद रंग का जुनून लंबे समय तक नहीं टिकेगा। जैसे ही यह संतृप्त होगा, बाजार को अगले बड़े 'एंटी-ट्रेंड' की आवश्यकता होगी। मेरी भविष्यवाणी है: **'डार्क मोड वेलनेस'** (Dark Mode Wellness) का उदय होगा। लोग अत्यधिक प्रकाश और 'कृत्रिम सकारात्मकता' से थक जाएंगे। वे जानबूझकर गहरे रंग, अराजक कला, और शायद ही कभी बोले जाने वाले 'ग्रे' या 'ब्लैक' वेलनेस रूटीन की ओर मुड़ेंगे। यह उन लोगों के लिए एक प्रतिक्रिया होगी जो महसूस करेंगे कि सफेद रंग केवल एक और दिखावा था। भविष्य की सबसे बड़ी क्रांति 'अपूर्णता को गले लगाना' होगी, न कि 'पूर्णता का दिखावा करना'।

खतरा: वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाना

सबसे बड़ा खतरा यह है कि यह सफेद पलायनवाद हमें वास्तविक, संरचनात्मक मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों से दूर रखता है—जैसे खराब कार्य-जीवन संतुलन, आर्थिक असुरक्षा, और सामाजिक अलगाव। एक सफेद कमरे में बैठकर ध्यान लगाने से आपकी तनख्वाह नहीं बढ़ेगी या आपका बॉस आपसे कम काम नहीं करवाएगा। असली **मानसिक स्वास्थ्य** सुधार के लिए कठिन बातचीत और प्रणालीगत बदलाव की आवश्यकता है, न कि केवल एक नया रंग पैलेट अपनाने की।

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अधिक जानकारी के लिए, मनोविज्ञान में रंग के प्रभाव पर शोध देखें: American Psychological Association (APA).