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पुलिस को 'मानसिक स्वास्थ्य' का बोझ: क्या यह संकट सिर्फ स्कॉटलैंड का है या राष्ट्रीय विफलता का संकेत?

By Arjun Khanna • December 19, 2025

हुक: वह अनकहा सच जो कोई नहीं बता रहा

जब पुलिस स्कॉटलैंड ने चेतावनी दी कि मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) से जुड़े कॉल-आउट्स अब 'अस्थिर' (unsustainable) हो गए हैं, तो मीडिया ने इसे केवल एक परिचालन समस्या के रूप में पेश किया। लेकिन यह सिर्फ एक पुलिसिंग का संकट नहीं है; यह पश्चिमी समाजों में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे की **विनाशकारी विफलता** का स्पष्ट प्रमाण है। असली सवाल यह है: पुलिस को क्यों बनना पड़ रहा है हमारा सबसे पहला और सबसे अक्षम मानसिक स्वास्थ्य फर्स्ट-रेस्पोंडर?

पुलिस बल, जो मूल रूप से कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशिक्षित हैं, अब मानसिक स्वास्थ्य संकटों से जूझ रहे हैं। यह चौंकाने वाला नहीं है कि यह स्थिति 'अस्थिर' है। यह तो होना ही था। **मानसिक स्वास्थ्य संकट** के बढ़ते मामलों को संभालने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में भारी कटौती और विशेषज्ञ संसाधनों की कमी ने पुलिस को एक ऐसी खाई में धकेल दिया है जिसके लिए वे तैयार नहीं हैं। यह सिर्फ स्कॉटलैंड की समस्या नहीं है; यह यूके और अन्य पश्चिमी देशों में सार्वजनिक सेवा वितरण की एक गहरी, प्रणालीगत विफलता है।

गहन विश्लेषण: कौन जीतता है और कौन हारता है?

इस संकट में सबसे ज्यादा नुकसान आम नागरिक उठा रहे हैं। एक व्यक्ति जिसे तत्काल मनोचिकित्सा सहायता की आवश्यकता है, उसे अक्सर घंटों तक पुलिस हिरासत या एम्बुलेंस की प्रतीक्षा में बिताने पड़ते हैं। पुलिस अधिकारी, जो अपने प्राथमिक कर्तव्य से हटकर संकट प्रबंधन में उलझे हुए हैं, बर्नआउट का शिकार हो रहे हैं।

छिपा हुआ विजेता? कोई नहीं, सिवाय उन निजी स्वास्थ्य प्रदाताओं के जो अंततः इस खाली जगह को भरने के लिए ऊंची कीमतों पर सेवाएं देंगे, या फिर राजनीतिक बयानबाजी करने वाले वे नेता जो जिम्मेदारी लेने से बचते हुए 'आपातकालीन फंडिंग' की घोषणा कर देंगे। हारने वाले स्पष्ट हैं: नागरिक, पुलिस बल, और सबसे महत्वपूर्ण, वे **मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं** जिन्हें दशकों से नजरअंदाज किया गया है। इस स्थिति का सीधा असर कानून व्यवस्था पर पड़ रहा है, क्योंकि वास्तविक अपराधों पर ध्यान कम हो रहा है। यह एक दुष्चक्र है।

पुलिस को 'मानसिक स्वास्थ्य' के मोर्चे पर झोंकना, एक प्रशिक्षित सर्जन से प्लंबिंग करवाने जैसा है। विशेषज्ञता का घोर दुरुपयोग हो रहा है। यह दिखाता है कि **स्वास्थ्य प्रणाली** (Health System) कितनी खोखली हो चुकी है।

भविष्य की भविष्यवाणी: आगे क्या होगा?

मेरी भविष्यवाणी है कि यदि तत्काल बड़े पैमाने पर निवेश नहीं किया गया, तो अगले तीन वर्षों के भीतर, पुलिस बल मानसिक स्वास्थ्य संबंधी कॉल का जवाब देने से **सक्रिय रूप से पीछे हटना** शुरू कर देंगे, भले ही इससे कानूनी जोखिम उत्पन्न हो। वे मांग करेंगे कि 'डिकमीशनिंग' (कार्यभार सौंपना) के लिए एक सख्त प्रोटोकॉल बने, जहां पुलिस केवल तभी हस्तक्षेप करे जब हिंसा का स्पष्ट खतरा हो। इसके परिणामस्वरूप, कुछ गंभीर मामलों में, जो लोग संकट में हैं, उन्हें आवश्यक सहायता मिलने में और अधिक देरी होगी, जिससे दुखद परिणाम सामने आ सकते हैं। सरकारें अंततः स्वास्थ्य सेवा पर खर्च करने के लिए मजबूर होंगी, लेकिन तब तक जो सामाजिक और मानवीय क्षति हो चुकी होगी, उसकी भरपाई असंभव होगी।

हमें पुलिसिंग पर कम और सामुदायिक **मानसिक स्वास्थ्य सहायता** (Mental Health Support) पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की तत्काल आवश्यकता है। यह केवल फंडिंग की बात नहीं है; यह प्राथमिकता बदलने की बात है।

मुख्य निष्कर्ष (TL;DR)